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दलित ख़ुद पर अत्याचार रोकने के लिए हिंदू धर्म छोड़ बौद्ध धर्म अपना लें: अठावले

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केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री ने कहा, बाबासाहब आंबेडकर ने बौद्ध धर्म तब अपनाया जब उन्हें भरोसा हो गया कि दलितों को हिंदू धर्म में न्याय नहीं मिलेगा.

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ. (फोटो: पीआईबी)

मुंबई: केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने बाबासाहब आंबेडकर का जिक्र करते हुए बुधवार को कहा कि उन्होंने बौद्ध धर्म तब अपनाया जब उन्हें पूरी तरह भरोसा हो गया कि दलितों को हिंदू धर्म में न्याय नहीं मिलेगा. अठावले ने समुदाय के सदस्यों से भी ऐसा ही करने को कहा.

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री अठावले ने यहां जारी किए गए एक बयान में कहा, बाबासाहब आंबेडकर ने बौद्ध धर्म तब अपनाया जब उन्हें पूरी तरह भरोसा हो गया कि दलितों को हिंदू धर्म में न्याय नहीं मिलेगा. लाखों दलितों ने भी धर्म परिवर्तन किया.

बयान के अनुसार मंत्री ने कहा कि आंबेडकर ने कट्टर हिंदुत्ववादियों को सुधार करने का मौका दिया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसलिए उन्होंने धर्म परिवर्तन किया.

अठावले ने कहा, सभी दलित अपने पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए हिंदू धर्म छोड़ दें और बौद्ध धर्म अपना लें.

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख अठावले ने बसपा प्रमुख मायावती को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि वह बार बार धमकियां देने की जगह उन्हें बौद्ध धर्म अपना लेना चाहिए.

इसके कुछ ही दिन पहले रामदास अठावले ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 20-25 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन की पैरवी की थी. उन्होंने कहा था कि सवर्ण तबकों के गरीबों को शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण देने से दलितों पर अत्याचार रुक जाएगा और जाति व्यवस्था खत्म होने में मदद मिलेगी.

अठावले ने यह भी कहा था कि उन्होंने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण देने का मुद्दा राजग की बैठक में उठाया है. उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि दलितों और सवर्णों के बीच संघर्ष पैदा करने का एक ही कारण आरक्षण है. इसलिए सामान्य वर्ग के उन लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण मिलना चाहिए जो आर्थिक रूप से पिछड़े हैं. ऐसा होने से दलितों पर अत्याचार रुक जाएगा और जाति व्यवस्था पर भी अंकुश लगेगा.

उन्होंने कहा, राजग की बैठक के दौरान मैंने यह मुद्दा रखा था. सामान्य श्रेणी के गरीब लोगों को 20-25 फीसदी आरक्षण दिया जा सकता है. इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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